पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा में रविवार को हुए एक विस्फोट में कम से कम पांच लोग घायल हो गए, जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की ओर से हाल के दिनों में सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बनाते हुए सुनियोजित हमले की यह दूसरी घटना है
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट क्वेटा पुलिस लाइन क्षेत्र में हुआ और घायलों को शहर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटनास्थल की घेराबंदी कर दी गई है। विस्फोट की प्रकृति के बारे में तत्काल पता नहीं चल पाया है। प्रतिबंधित संगठन टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली है। इसने कहा कि विस्फोट में सुरक्षा अधिकारियों को निशाना बनाया गया था।
इस बीच क्वेटा के नवाब अकबर बुगती स्टेडियम में खेले जा रहे पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) मैच को विस्फोट के कारण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा, जिसमें कप्तान बाबर आजम और पूर्व ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी जैसे हाई प्रोफाइल खिलाड़ी भाग ले रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि कोई भी खिलाड़ी घायल नहीं हुआ है।
कुछ दिन पहले पेशावर की एक मस्जिद में दोपहर की नमाज के दौरान तालिबान के एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया था जिसमें 101 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। पाकिस्तान आतंकवाद की ताजा लहर से प्रभावित हुआ है। इस लहर से देश का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, इसके अलावा इसकी सीमा से सटे बलूचिस्तान और पंजाब के मियांवाली शहर में आतंकी हमले देखे गए हैं।
पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार के मुताबिक, शुक्रवार को शीर्ष समिति की बैठक के दौरान पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व ने टीटीपी को नियंत्रित करने के लिए अफगान तालिबान प्रमुख हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्तक्षेप की मांग करने का फैसला किया था। पिछले साल नवंबर में टीटीपी ने जून 2022 में सरकार के साथ हुए अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम को रद्द कर दिया था और अपने आतंकवादियों को सुरक्षा बलों पर हमले करने का आदेश दिया था।
टीटीपी को अलकायदा से करीबी संबंध रखने वाला संगठन माना जाता है। इसने धमकी भी दी है कि अगर सत्तारूढ़ गठबंधन आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना जारी रखता है, तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पीएमएन-एल और विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की पीपीपी के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाएगा।
वर्ष 2007 में कई आतंकवादी संगठनों के समूह के रूप में गठित टीटीपी ने संघीय सरकार के साथ संघर्ष विराम तोड़ लिया था और अपने आतंकवादियों को देश भर में आतंकवादी हमले करने का आदेश दिया था। इस समूह को 2009 में सेना मुख्यालय पर हमला, सैन्य ठिकानों पर हमला और 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल पर बमबारी सहित पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए दोषी ठहराया गया है।

