जालंधर – लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रभाग ने हाल ही में लोकप्रिय ‘अतुल्य भारत’ कार्यक्रम के एक विस्तृत हिस्से के रूप में ऑस्ट्रेलिया के कर्टिन विश्वविद्यालय के 12 विद्यार्थियों और शिक्षकों की मेजबानी की। दो सप्ताह के इस प्रोग्राम के दौरान, भाग लेने वाले विद्यार्थियों को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और भारत देश की व्यापक समझ प्राप्त हुई।
एलपीयू में पेश किए गए ‘अतुल्य भारत’ कार्यक्रम का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना और विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, विरासत, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी में गहन सीखने का अनुभव प्रदान करना है। कार्यक्रम ने ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और यूके सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थियों के बीच महत्वपूर्ण लोकप्रियता हासिल की है, जिससे एलपीयू उन कुछ भारतीय विश्वविद्यालयों में से एक बन उभरा है जो सक्रिय रूप से इन देशों के स्टूडेंट्स की मेजबानी करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान, ऑस्ट्रेलियाई प्रतिभागियों को भारत में विभिन्न प्रगतिशील अवधारणाओं से परिचित कराया गया, जिनमें फैशन, खाना पकाने, नृत्य, सामाजिक ताना-बाना, योग, ध्यान, शाकाहार, बुनियादी हिंदी भाषा, इतिहास, अद्वितीय व्यावसायिक रुझान, प्रौद्योगिकी, “जुगाड़ (मेक शिफ्टर)” व्यवसाय, मैनेजमेंट और कला शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों जैसे स्वर्ण मंदिर, ताज महल, तिब्बती मंदिर और अन्य सांस्कृतिक विरासत स्थलों का दौरा करने का भी अवसर मिला।
एलपीयू के वाईस प्रेजिडेंट और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रभाग के प्रमुख डॉ. अमन मित्तल के अनुसार ऐसे प्रोग्राम से एलपीयू यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि “हमारे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षार्थियों को दो सप्ताह का एक यादगार और संतुलित कैंप मिले जो प्राचीन और आधुनिक भारत दोनों में ही अंतर्दृष्टि प्रदान करता हो। इस प्रति कार्यक्रम को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है विविध अनुभव प्रदान करके शिक्षा और संस्कृति के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बढ़ावा दिया जा सके।”
एलपीयू को भारत का सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीयकृत परिसर होने पर गर्व है, जिसमें 40 से अधिक देशों के विद्यार्थी 150 से अधिक कार्यक्रमों में नामांकित हैं। विश्वविद्यालय ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और यूके सहित दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ ऐसे स्टूडेंट एक्सचेंज कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेता है। यह न केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अनुभव को समृद्ध करता है बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक समझ को भी बढ़ावा देता है।

