कपूरथला( गौरव मढ़िया)दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम कपूरथला में साप्ताहिक सत्संग समागम का आयोजन किया गया। जिस का आरंभ श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी हरिप्रीता भारती जी ने एक प्रार्थना गायन के माध्यम से किया।
अपने विचार व्यक्त करते हुए साध्वी ऋतु भारती जी ने कहा के गुरु शिष्य का संबंध संसार का सबसे श्रेष्ठ संबंध है जिस में सामाजिक और आध्यात्मिक दोनो रिश्ते बखूबी निभाने का सामर्थ्य होता है माता सा दुलार, पिता की फटकार,पूर्वजों के संस्कार और मूर्तिकार सा निर्माण छिपा होता है।
मानव जीवन के मूल्य को यदि पूर्णता देनी है वह केवल गुरु ही कर सकते है क्योंकि जीवन का लक्ष्य ईश्वर दर्शन जो बिना दिव्य दृष्टि के असंभव है।ईश्वर की प्रथा अनुभूति भक्ति का आरंभ भी माना गया है।संत या गुरु रूप में भगवान ही साकार देह लेकर आ जाते है।
इस लिए निगुरे व्यक्ति को में ग्रंथों में भी नर्क का भागी बताया क्योंकि गुरु रूप कश्ती में बैठ कर ही संसार सागर को पर किया जा सकता है।
सत्संग का आनंद उठाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और प्रभु कृपा का पात्र बने।

