लतीफ़पुरा की घटना बहुत ही घिनौनी है,आम आदमी पार्टी ने आम आदमी के साथ अन्याय किया है-सरबजीत सिंह मक्कड़
जालंधर(गौरव मढ़िया )लतीफपुरा में करीब एक सप्ताह पहले कोर्ट के आदेशों पर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और निगम प्रशासन के द्वारा कई मकानों पर कार्रवाई करते हुए डिच चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया था।
इस कार्रवाई के बाद अब बेघर हुए लोगों का हालचाल जानने के लिए कई सियासी पार्टियां पहुंचना शुरू हो गई है।वहीं आज लतीफ पुरा में बेघर हुए लोगों का हालचाल जानने के लिए केंद्रीय उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश पहुंचे है।
इस दौरान उनके साथ पूर्व विधायक व भाजपा प्रदेश वित्त कमेटी के सदस्य सरबजीत सिंह मक्कड़,पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया,केडी भंडारी,साहिब सिंह ढिल्लो,राकेश राठौर भी मौजूद रहे।लोगों ने केंद्रीय मंत्री के साथ अपना दुख साझा किया और बताया कि वह किन हालातों से गुजर रहे हैं।
वहीं,लोगों को इस हाल में देखते हुए केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश ने कहा कि उन्हें यहां पहुंचकर बेहद दुख हुआ।कड़ाके की ठंड में लोग टेंट में सोने के लिए मजबूर हैं।सरकार को इनके घरों का इंतजाम करना चाहिए था।उन्होंने लतीफपुरा में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर 1947 से जालंधर के लतीफपुरा में रह रहे लोगो को बेघर करने का सख्त नोटिस लिया है।
उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक आश्रय दिए इन लोगों को बेदखल कर दिया गया है।सोम प्रकाश के मुताबिक पोह के महीने में इन लोगों को अमानवीय तरीके से विस्थापित किया गया है,साथ ही उन्होंने खबरों में पुलिस द्वारा इलाके के बुजुर्गों के साथ की गई बदसलूकी का भी संज्ञान लिया।
इस अवसर पर सबजीत सिंह मक्क्ड़ ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा है कि इस ठंड के महीने में बेदखल करने से पहले उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए था।मक्कड़ ने आम आदमी पार्टी को घेरते कहा कि लतीफपुरा के ऐसे हालत को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे अफगानिस्तान में कोई बम ब्लास्ट हुआ हो।
उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत ही घिनौनी है आम आदमी पार्टी ने आम आदमी के साथ अन्याय किया है।उन्होंने कहा कि एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री नरिंदर मोदी जी बेघरों को घर बना कर दे रहे है और दूसरी तरफ पंजाब की झूठी और दोखेबाज मान सरकार आजादी से पहले बसे लोगो के घरो को उजाड़ रही है।
उन्होंने कहा कि इन पीड़ित लोगों से मिलीभुगत से धोखा हुआ है।इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट जानबूझ कर इस केस की पैरवी नहीं कर सका।माननीय अदालतों के फैसलों का सम्मान करते हैं लेकिन अदालतों को भी दस्तावेजों को देखकर फैसला सुनाना चाहिए।यह गरीब लोग तो कोर्ट में तो गए नहीं न ही इनकी तरफ से कोई वकील गया इसी कारण यह फैसला इनके खिलाफ आ गया।

