कपूरथला 12 जून (गौरव मढ़िया) 28 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में इस्कान कपूरथला की ओर से 27वी संध्या बिमला एन्क्लेव में निकाली गई. जिस में सेंकड़ों भक्तों ने हिस्सा लिया। लोगो मे भगवान की रथ यात्रा प्रति उत्साह दिन प्रति दिन बढ़ रहा है. लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। लोगो ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। ये संध्या हरिनाम फ़ेरी कांग्रेस ब्लॉक प्रधान दीपक सलवान, MC वीणा सलवान के निवास स्थान से शुरु की गई। और सम्पति महाआरती और अभिषेक करण और नायरा के यहाँ किया गया। कॉलोनी वालों ने आरती उपरान्त भगवान् को भोग लगा कर भक्तों को प्रसाद बाँटा।
भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) ने बताया की आज भगवान् जगन्नाथ जी का प्रकट्या दिवस है। इस दिन को देव स्नान पूर्णिमा भी कहा जाता है। पूरे विश्व में जहाँ भी भगवान् जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा जी का मंदिर है वहां पर भगवान् की स्नान यात्रा की जाती है। जैसे भगवान् कृष्ण की अनन्य लीलाएँ है वैसे ही उनके भक्त हैँ। पर सभी भक्तों से श्रेष्ठ भक्त हैँ गोपियां। जिन्हे भगवान् सदैव स्मरण करते हैँ। द्वारिका पुरी में भगवान् की 16108 रानियां होते हुए भी भगवान् कृष्णा अक्सर नींद में कभी यशोदा को, कभी गोप गोपालों को, तो कभी गोपिओं और राधा रानी को याद करते। तो सभी रानियाँ यह जानना चाहती थीं की ऐसा क्या है गोपिओं के प्रेम में जो हमारे प्रेम मे नहीं है।
तो गोपिओं ने माता रोहिणी से पूछा इसका राज़ क्या है। माता रोहिणी ने बोला की में यह कथा तभी बताऊँ गी अगर कृष्ण और बलराम इसको ना सुने। तो उन्होंने कहा सुभद्रा माताजी को कक्ष के बहार खड़ा कर देते हैँ ता जो कृष्ण और बलराम यह कथा ना सुन सकें। पर जब माता रोहिणी ब्रज धाम की लीलाओं का वर्णन करने लगीं तो माता सुभद्रा इतनी भविभोर हो गईं की उन्हे पता ही नहीं चला की कब कृष्ण और बलराम आ कर उनके पास खड़े हो गये और कथा सुनने लगे। जैसे हि तीनो भाई बहन ने कथा सुनी उनका शरीर पिघलने लगा, हाथ पैर अंदर चले गये, आँखे बड़ी बड़ी हो गई, उनकी पलके भी सगकी गईं। तभी वहां पर नारद मुनी जी आ जाते है और भगवान् को कहते हैँ की आप मुझे वचन दी जिये की आप कलयुग के लोगों का उधार करने के लिए इसी रूप में अवत्रित होंगे।
तो उसी वचन को पुरा करने के लिए भगवान् जगन्नाथ पुरी मे राजा इन्दर दुमन के स्वप्न में आकर उन्हे बताया की में समुन्द्र से प्रकट हाऊंगा। तुम मेरा विग्रह बना कर उसे मंदिर मे स्थापित करना। और जेष्ठ मास की पूर्णिमा को मेरा प्राक्त्या हुया था तो तुम इस दिन मेरा अभिषेक करना और मेरी पूजा अर्चना करना। इसी दिन से भगवान् की स्नान यात्रा का उत्स्व मनाया जाता है।
कॉलोनी निवासिओं ने बहुत ही हर्षो उल्लास के साथ भगवान् का अभिषेक किया। स्नान उत्सव पर विशेष तोर पर कई गणमान्य उपस्थित थे।
आगे बताते हुये प्रभुजी ने कहा की 28जून को शाम 5:00 बजे प्राचीन श्री रानी साहिबा मंदिर से सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। आप सभी से निवेदन है की रथ यात्रा पर आएं और भगवान् के रथ की रस्सी को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करें।

