इस अवसर पर ‘वायु प्रदूषण’ पर जागरण संगोष्ठी और आम लोगों पर इसके बुरे प्रभाव के खिलाफ जानकारी का हुआ आयोजन
* देश के ‘लंग्स केयर फाउंडेशन एंड डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन’ की टीम ने संबंधित विचार प्रस्तुत किये
* “स्वस्थ तथा धनवान पंजाब देखने के लिए पराली जलाने से बचें”, मेहमान टीम ने कहा
* संभ्रांत वक्ताओं ने विद्यार्थियों को प्रदूषण के खिलाफ एक नायक की तरह संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया
जालंधर:(टॉक हिंदुस्तान) लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) की स्टूडेंट वेलफेयर विंग ने ‘वायु प्रदूषण’ विषय पर जागरुकता संगोष्ठी और आम लोगों पर इसके सबसे बुरे प्रभाव के खिलाफ कार्रवाई के लिए जानकारी युक्त आयोजन व् विचार विमर्श किया। यह जागरूकता कार्यक्रम देश के ‘लंग्स केयर फाउंडेशन और डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन’ के सहयोग से शांति देवी मित्तल ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था। मुख्य रूप से कुलीन डॉक्टरों पर आधारित टीम ने राज्य और देश में प्रदूषण की समस्या को नियंत्रित करने के लिए एक विस्तृत विचारधारा प्रस्तुत की।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह था कि सभी को यह एहसास होना चाहिए कि ‘वायु प्रदूषण’ एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल है। यह एक मूक हत्यारा है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों की जान ले रहा है और कई पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान एलपीयू परिसर में टीम द्वारा स्वच्छ वायु पर एक घोषणा की गई कि स्वच्छ हवा प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक नागरिक अधिकार है; कार्रवाई के लिए कई टीमों का निर्माण हो ; इसके लिए व्यापक रूप से संवाद करें; चिकित्सा पेशेवरों के बीच क्षमता विकसित करना हो; और विशेष रूप से बनाए गए कार्य समूहों के माध्यम से कई हितधारकों को शामिल करें । पराली जलाने के माध्यम से राज्य में अवांछित धुएं से होने वाली प्रदूषण की समस्या के बारे में बात करते हुए टीम ने प्रभावशाली आंकड़े प्रस्तुत किए जो बड़े पैमाने पर मानव जीवन को खतरे में डाल सकते हैं।
टीम में डॉ. कारमिन उप्पल-कार्यक्रम प्रबंधक, डीएफसीए शामिल थे, जिन्होंने विभिन्न प्रयासों और उभरती समस्या के समाधान के बारे में बात की। प्रदेश अध्यक्ष डॉ पी एस बख्शी ने वायु प्रदूषण के क्षेत्रीय स्रोतों और इसके स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जानकारी दी। संस्थापक ट्रस्टी, राजीव खुराना ने इच्छा जाहिर की कि सभी अगली पीढ़ियों को “स्वच्छ हवा” का उपहार देने के लिए अभी से वायु प्रदूषण के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करें। यह भी सुझाव दिया गया कि परोक्ष रूप से बहुत उपयोगी पराली जलाने पर कई-कई लाख रुपये कुछ ही समय में बर्बाद हो जाते हैं।
टीम ने पराली को बेकार जलाने की बजाय इससे उत्पादक परिणामों का भी सुझाव दिया गया कि इसका कागज उद्योग में; इथेनॉल और अन्य रसायनों के उत्पादन के लिए; खराब मौसम के दिनों में पशुओं के लिए चारा; और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने आदि के लिए भी भरपूर उपयोग हो सकता है। इस प्रकार, संभ्रांत वक्ताओं ने विद्यार्थियों को प्रदूषण के खिलाफ एक नायक की तरह संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया। इस संबंध में और साथ ही, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत’ के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, एलपीयू के जागृत विद्यार्थियों ने मेहमान टीम की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए सहमति दिखाई |

