पराली जलाने के मामलों में जीरो टालरैंस नीति अपनाई जाए, जुर्माना और रैड एंट्री की जाए सुनिश्चित
डिप्टी कमिश्नर द्वारा अधिकारियों को अगले 10 दिनों के दौरान फील्ड विजिट में तेजी लाने के निर्देश
किसानों से धान की पराली जलाने के रूझान को छोड़ने की अपील की
जालंधर, 02 नवंबर: डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने सब डिवीजन शाहकोट, फिल्लौर और नकोदर में पिछले कुछ दिनों में पराली जलाने के मामले सामने आने पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नरों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों को पराली जलाने के प्रति जीरो टॉलरैंस की नीति अपनाने और उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने के इलावा राजस्व रिकार्ड में रैड एंट्री करने के निर्देश दिए है।
कमिशन फार एयर क्वालिटी मैनेजमैंट की वर्चुअल क्राफैंस में भाग लेने के बाद, डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमित महाजन शाहकोट, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (शहरी विकास) जसबीर सिंह फिल्लौर और अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) वरिंदरपाल बाजवा नकोदर में धान की पराली जलाने के मामलों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी होंगे।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड विजिट तेज कर पराली जलाने की प्रवृत्ति को रोकने की जरूरत है। डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां क्लस्टर/नोडल अधिकारियों द्वारा पराली जलाने की पुष्टि की जाती है, वहीं वातावरण मुआवजा जुर्माना लगाने के साथ-साथ रैड एंट्री सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि धान की कटाई का 70 फीसदी सीजन पूरा हो चुका है और अधिकारियों को अब अगले 10 दिनों तक गंभीर कदम उठाने की जरूरत है ताकि पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी न हो और पिछले साल की तुलना में यह 50 फीसदी से कम हो।
डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों को पराली जलाने के प्रत्येक मामले का फिजीकल वैरीफीकेशऩ सुनिश्चित कर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन उप मंडल मैजिस्ट्रेटों के क्षेत्र में अधिक मामले आ रहे हैं, वे इस पर विशेष ध्यान दें।उन्होंने कहा कि धान की पराली जलाने पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। श्री सारंगल ने कहा कि इसके अलावा कृषि, सहकारिता, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, शिक्षा और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभिन्न विभागों द्वारा जागरूकता गतिविधियां की जा रही है।
डिप्टी कमिश्नर ने किसानों से अपील की कि वे धान की पराली जलाने के रूझान को हर हाल में रोकें, क्योंकि यह पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा धान की पराली को आग न लगाने के बारे में जागरूक करने के लिए 600 वॉल पेंटिंग करवाने के साथ 120 जागरूकता कैंप भी लगाए गए है। उन्होंने कहा कि धान की पराली किसानों के लिए फायदेमंद है और इसे किसी भी कीमत पर न जलाया जाए।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि अधिकारी जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क कर उन्हें पराली को आग न लगाने के बारे में जागरूक करे तथा कृषि में सरफेस सीडर आदि कृषि उपकरणों के प्रयोग को प्रोत्साहित करते हुए किसानों को जागरूक करे ताकि पराली को आग लगाने की घटनाओं को रोका जा सके।

