कपूरथला ( गौरव मढ़िया ) 29 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में शुक्रवार को इस्कान कपूरथला की ओर से सातवी हरिनाम संध्या फ़ेरी ग्रेटर कैलाश से निकाली गई। जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। इससे पता चलता है कि लोगो मे भगवान की रथ यात्रा को लेकर कितना उत्साह है। और यह उत्साह हर दिन बढ़ता हि जा रहा है। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। मोहल्ले वालो ने पुष्प वर्षा तथा सुन्दर आतिशबाजी के साथ भगवान का स्वागत किया। ये संध्या हरिनाम श्री अशोक ग्रोवर ओर विपुल ग्रोवर जी के निवास स्थान से शुरू होकर श्री मुनीश अरोड़ा प्रभु जी के निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुआ। मुनीश आरोड़ा जी के पूरे परिवार ने बड़ी धूम धाम से भगवान् का स्वागत किया। भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए इस्कॉन कपूरथला के संचालक नीरज अग्रवाल (नकुल दास) जी ने कहा की हम सब ठीक से भगवान् की सेवा भी नही कर पाते। परन्तु गोपियां हर प्रकार से भगवान् की सेवा करने को त्यार रहती थीं।

उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा की एक दिन भगवान कृष्ण जी को भुखार हो जाता है ओर नारद जी भगवान को पुछते है की आप को क्या हुआ है भगवन, तो भगवान कृष्ण कहते हैं कि नारद मुझे बुखार् हो गया है तो नारद मुनी बोले भगवान आप को बुखार कैसे हो सकता है जरूर यह आपकी कोई लीला होगी। चलिए बताइये आपका बुखार किस प्रकार् उतरेगा। तो भगवान् कृष्ण ने कहा की मुझे किसी भक्त के चरणों की धुलि चाहिए जिससे मेरा भुखार उतर जायेगा। नारद जी ने वैसा ही किया वो कभी अर्जुन के पास कभी किसी भक्त के पास उनके चरणों की रज लेने गए पर सभी ने मना कर दिया क्युकी ऐसा करने से भगवान कृष्ण के प्रति अपराध लगेगा और नर्क भी जाना पड़ सकता है। कोई भी पाप का भागीदार नही बनना चाहता था। अन्त मे नारद जी भगवान कृष्ण के कहने पर वरिन्दावन मे गोपियो के पास गए।

ओर उन्हे भगवान की हालत के बारे मे बताया तो गोपियो ने कहा की हम थोड़ी सी क्या अपना सब कुछ न्यूछावर करने के लिए तैयार हैँ। गोपियो ने अपने चरणों की रज देने के लिए तैयार हो गयी। नारद मुनी जी ने कहा इस के लिए आप सबको नर्क भी जाना पड़ सकता है, किन्तु गोपियों ने कहा अगर कृष्ण को प्रसन्न करने के कारण हमें नर्क भी जाना पड़े तो हम त्यार हैँ। यह होता है समर्पण। इस तरह से भगावान कृष्ण ने उनके चरणों की रज को अपने माथे पर लगाया ओर वो ठीक हो इस। इस संसार मे गोपियो से ऊपर भगवान कृष्ण का परम भक्त कोई नही और। हम सब को भी गोपियो जैसे शुद्ध भाव अपने हृदय मे विराजित करने हैँ।

स्कंद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि रथ-यात्रा में जो व्यक्ति श्री भगवान् जी के नाम का कीर्तन करता हुआ रथ के रस्से को खींचता है वह पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है। जो व्यक्ति भगवान के नाम का कीर्तन करता हुआ रथयात्रा में शामिल होता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की बहन ने एक बार नगर देखने की इच्छा जताई। तब जगन्नाथ और बलभद्र अपनी लाडली बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाकर नगर दिखाने निकल पड़े। इस दौरान वे मौसी के घर गुंडिचा भी गए और यहां सात दिन ठहरे. तभी से जगन्नाथ यात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है।

भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथ पुरी में आरंभ होती है और इसका समापन दशमी तिथि को होता है। रथ यात्रा में सबसे आगे ताल ध्वज पर श्री बलराम, उसके पीछे पद्म ध्वज रथ पर माता सुभद्रा और सुदर्शन चक्र होता है और अंत में गरुण ध्वज पर नंदीघोष नाम के रथ पर श्री जगन्नाथ जी होते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की बहन ने एक बार नगर देखने की इच्छा जताई। तब जगन्नाथ और बलभद्र अपनी लाडली बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाकर नगर दिखाने निकल पड़े। इस दौरान वे मौसी के घर गुंडिचा भी गए और यहां सात दिन ठहरे। तभी से जगन्नाथ यात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है। स्कंद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि रथ-यात्रा में जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी के नाम का कीर्तन करता हुआ चलता है, वह पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है.

प्रभु जी ने आगे बताते हुये कहा की जब भगवान वरिन्दावन को छोड़ कर जाने लगे तो गोपिया उनके रथ के आगे लेट गयी क्युकी वो सभी भगवान को अपने से दूर नही देखना चाहती थी। पर जब भगवान् कृष्ण कुरुक्षेत्र में स्नान करने के लिए आये तो गोपियों ने बल्रराम जी सुभद्रा माता ओर भगवान कृष्ण को एक रथ मे विराजमान करके ओर रथ से घोड़ों को निकाल कर खुद रथ को खिचने लगी ये होता है भगवान के प्रति शुद्व भाव, जो हम लोगो ने भी अपने हृदय मे लेकर आना है तभी हम सही भगवान की शुद्व भक्ति ओर सेवा कर पायेगे। अभी हम लोगो के मन मे वैर, विरोध, तेरा मेरा, एक दूसरे से द्वेष आदि भरा पड़ा है। जिससे हमारा हृदय अशुद्ध हो चुका है।

आगे बताते हुये नीरज अग्रवाल (नकुल दास) जी ने कहा की 29 जून को सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। इन हरिनाम संध्या फेरिओं से हम सभी का हृदय शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भगवान् हमारे हृदय में प्रवेश कर सकें। जिसके लिये हर दिन संध्या हरिनाम निकाल कर लोगो को भगवान के हरिनाम मे शामिल करते हैँ। ताकि उनका मनुष्य जीवन व्यथ न हो जाये।
हरे कृष्णा

