भारतीय सेना ने पंजाब के डेरा बाबा नानक में 54वें डीबीएन दिवस के अवसर पर वर्ष 1971 के ‘ऑपरेशन अकाल’ में भाग लेने वाले डोगराई ब्रिगेड के वीर योद्धाओं के शौर्य को नमन करते हुए श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। ऑपरेशन अकाल पश्चिमी मोर्चे पर वज्र कोर (Vajra Corps) द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण आक्रामक कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य शकरगढ़ सेक्टर में पाकिस्तान की 1 कोर को बांधे रखना था, जिससे शत्रु बलों की पुनः तैनाती को रोका जा सका।

समारोह की शुरुआत एक गरिमामय पुष्पांजलि अर्पण समारोह से हुई, जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, वीर सैनिकों के परिजन, दिग्गज (वेटरन्स) एवं नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर उन वीर सैनिकों की वीरता, व्यावसायिक दक्षता एवं सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं का निर्वहन किया।

सभा को संबोधित करते हुए मेजर जनरल कार्तिक सी. शेषाद्रि, वीएसएम ने ऑपरेशन अकाल की स्थायी विरासत एवं उसकी परिचालनात्मक महत्ता पर प्रकाश डाला तथा पश्चिमी मोर्चे पर उच्चतम परिचालन तैयारियों को बनाए रखने एवं राष्ट्र की रक्षा हेतु सदैव सजग रहने के प्रति भारतीय सेना की अटल प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम के दौरान दिग्गज सैनिकों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ आत्मीय संवाद भी हुआ, जिसने सेना और नागरिकों के मध्य कालातीत संबंध को और सुदृढ़ किया तथा सैन्य-नागरिक सहभागिता की भावना को बल प्रदान किया।

समारोह के पूर्व आयोजित सांस्कृतिक एवं सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों ने भारतीय सेना के सेवा-भाव और समाज के प्रति उसकी गहन प्रतिबद्धता को प्रतिध्वनित किया।

यह आयोजन डीबीएन के वीर योद्धाओं की गौरवशाली विरासत को नमन करते हुए भारतीय सेना द्वारा भारत की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा हेतु दृढ़, सजग एवं प्रतिबद्ध रहने की पुनः शपथ के साथ संपन्न हुआ — जिनकी वीरता आज भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा प्रदान करती है।

