प्रशासन ने जालंधर में बाढ़ आने से पहले 12000 लोगों को बचाया, 1160 लोगों को किशतियों के द्वारा बाहर निकाला गया: विशेष सारंगल
राज्य सभा मैंबर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी निकालने के लिए कहा
टीम ने प्रशासन द्वारा किए गए राहत कामों पर संतोष किया व्यक्त
जालंधर, 9 अगस्त : भारत सरकार की सात सदस्यता अंतर- मंत्रालय टीम द्वारा बुद्धवार को बाढ़ कारण हुए नुक्सान का जायज़ा लेने के लिए जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम में नैशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथारिटी के वित्तीय सलाहकार रवीनेश कुमार, केंद्रीय कृषि और किसान भलाई विभाग के डायरैक्टर बी. के. श्रीवास्तवा, फलड्ड मैपिंग प्रमुख और साईस्टिस्ट इंजीनियर डा. ए. वी. सुरेश बाबू, अतिरिक्त सचिव ( एस.ए.जी.वाई.) देहाती विकास विभाग कैलाश कुमार, एम एंड ए डीटीई के डायरैक्टर अशोक कुमार जेफ, सहायक डायरैक्टर ( पी. एफ. एस.) अंजली मौर्य और एस.ई.आर.ई., रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवेज मंत्रालय के नवीन कुमार चौरसिया शामिल थे, जिनको डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल द्वारा बाढ़ कारण हुए नुक्सान और ज़िला प्रशासन द्वारा किए गए राहत कामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रैज़ेनटेशन दौरान डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि शाहकोट सब- डिविज़न में पड़ते गाँवों में बड़े स्तर पर नुक्सान हुआ है और बाढ़ कारण 6 दरारे आई थी। उन्होंने टीम को राहत और बचाव कामों के साथ पीडित लोगों की मदद के लिए किए जा रहे पुर्नवास के कामों बारे भी जानकारी दी। सारंगल ने बताया कि बाढ़ कारण 25 गाँवों में 22476 एकड़ क्षेत्रफल का नुक्सान हुआ है। 40 गाँवों में 13108 एकड़ में फसले क्षतिग्रस्त हुई है, 50 घर और 30 स्कूल बुरी तरह प्रभावित हुए है। इसके इलावा पी. एस.पी.सी.एल को खंबों, प्लांट और अन्य बुनियादी ढांचे को हानि पहुँचने कारण करीब 139. 60 लाख रुपए का नुक्सान हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में बासमती 1509 और पी.आर. 126 की पनीरी मुफ़्त मुहैया करवाई गई है, जिससे लगभग 6400 एकड़ क्षेत्रफल में धान की फिर लगाई हुई है। उन्होंने केंद्रीय टीम को यह भी बताया कि पानी खडा होने के कारण 5000 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में किसान दोबारा बिजाई नहीं कर सकेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन द्वारा बाढ़ आने से 48 घंटे पहले 50 गाँवों में अलर्ट जारी कर दिया गया था और टीमों की तरफ से जिले में बाढ़ आने से पहले 12000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। 1160 लोगों को किशतियों के द्वारा उनके घरों में से बाहर निकाला जिसमें 24 स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई थी, जिन्होंने 14600 लोगों का इलाज किया , इनमें ज़्यादातर को दस्त, चमड़ी के रोग आदि की शिकायत थी। पशु पालन विभाग को प्रभावित व्यक्तियों के पशुओं के इलाज का काम सौंपा गया था, जिससे पशुधन का कोई जानी नुक्सान नहीं हुआ।
डिप्टी कमिश्नर ने यह भी बताया कि बाढ़ का पानी दाख़िल होते ही प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिए गए थे। उन्होंने बताया कि टीमों की तरफ से सरकार, स्थानीय लोगों के सहयोग से 105000 राशन किटों और 1 लाख पानी की बोतलें ,मच्छरदानियाँ, सैनेटरी नैपकिन और अन्य ज़रूरी सामान भी बँटा गया। उन्होंने बताया कि एन.डी.आर.एफ. और एस.डी.आर.एफ. की दो टीमों, फ़ौज की एक टीम को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।
अंतर- मंत्रालय केंद्रीय टीम ने बाढ़ दौरान ज़िला प्रशासन द्वारा किए गए राहत कामों पर संतोष व्यक्त किया।
इस उपरांत टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों महराजवाला, कंग खुर्द, गट्टा मुंडी कासू, मंडाला छन्ना और अन्य गाँवों का दौरा भी किया गया, जहाँ राज्य सभा मैंबर संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने केंद्रीय टीम को बाढ़ कारण हुए नुक्सान के बारे में विस्तार के साथ जानकारी दी। राज्य सभा मैंबर ने भविष्य में बाढ़ से बचाव के लिए धुस्सी बाँध को चौड़ा और मज़बूत करने की ज़रूरत के साथ गिद्दड़पिंडी रेलवे पुल के नीचे से मिट्टी निकालने को यकीनी बनाने का मुद्दा भी उठाया। इस मौके मुख्य तौर पर लोक निर्माण विभाग के सचिव नीलकंठ अवध, डिविज़नल कमिश्नर गुरप्रीत कौर सपरा, अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर ( विकास) वरिन्दरपाल सिंह बाजवा, अतिरिक्त डिप्टी कमिशनर ( ज) मेजर डा. अमित महाजन और एस.डी.एमज़ भी मौजूद थे।

