कपूरथला (गौरव मढ़िया)दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, शाखा कपूरथला में आयोजित सत्संग समागम के दौरान दिव्य ज्योति के मंच से संस्थान की ओर से श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी रमन जी ने होली पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए विचारों में बताया
कि होली का बसंती रंग सद्भावना, भाईचारे का प्रतीक है। हर वर्ष यह त्योहार यही प्रेरणा लिए आता है। परंतु याद रखें, भाईचारा( brotherhood )सदा ही पिताचारे ( fatherhood) के पश्चात ही स्थापित हो सकता है। आप सांसारिक स्तर पर दृष्टि डालें, सर्वप्रथम पिता से संबंध जुड़ता है अर्थात उसके द्वारा जन्म मिलता है, उसके पश्चात ही भाई से स्नेहिल डोर। अतः सामाजिक भाईचारे को स्थापित करना है

तो सर्व प्रथम परम पिता परमेश्वर से अलौकिक संबंध जोड़ना होगा। इसलिए जन जन को ब्रह्मज्ञान प्राप्ति के लिए प्रेरित होना होगा। कारण कि ब्रह्मज्ञान प्रदत्त ईश्वरीय अनुभूति ही हमारा परमात्मा से स्थाई संबंध जोड़ती है और इसके लिए अनिवार्य ब्रह्मज्ञान प्रदाता सतगुरु की शरणागति।
जब हर जीवात्मा का संबध ईश्वर से जुड़ेगा परिणामस्वरूप तब ही भाईचारे अर्थात होली की प्रेरणा साकार हो सकती है। इन्ही विचारों के साथ साध्वी तेजस्विनी भारती जी ने भजन संकीर्तन का गायन किया गया।

