कपूरथला 2 जून (गौरव मढ़िया) 28 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में रवीवार को इस्कान कपूरथला की ओर से 17वी संध्या फ़ेरी विंडसर पर्क और रोज आवेन्यू में निकाली गई। जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। लोगो मे भगवान की रथ यात्रा प्रति उत्साह दिन प्रति दिन बढ़ रहा है। सभी शहर निवासी बड़ी हि उत्सुक्ता के साथ रथ यात्रा का इंतज़ार कर रहे हैँ। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। कालोनी वालो ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। ये हरिनाम संध्या फेरी जयपाल गोयल, मोनिका गोयल के निवास स्थान से शुरु हो कर जतिंदर गुप्ता के निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुई।
भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) ने एक कथा के बारे मे बताते हुए कहा की एक बार दास्या बोरी नाम का व्यक्ति था। जिस में केवल एक हि विशेषता थी की वो हमेशा भगवान के नाम का श्रवण करता ओर कीर्तन करता था। कहने का तात्पर्य है की अगर हम भगवान कृष्ण के किसी भक्त से उनकी लीलाओ ओर उनके गुणों के बारे मे श्रवण करेगे तभी हमारे हृदय में भगवान् के प्रति प्रेम उत्पन्न हो सकता है ओर कीर्तन के द्वारा हम भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर सकते हैं। दास्या बोरी नामक भक्त रात को सोते हुए भगवान् जगन्नाथ जी से यही प्रार्थना करता था की भगवान् आपने तो पतीतों का उधार करने के लिए अवतार लिया है और इस संसार में मुझ से अधिक पतीत कोई नहीं है। आप कब मेरा उधार करोगे। एक दिन दस्या बोरी ने सोते हुए प्रार्थना की, की हे भगवान् जगन्नाथ आप कब मुझे अपने चतुर भुज रूप के दर्शन दोगे।

ऐसा कहते हि भगवान् वहां प्रकट हो गये। और दास्या को वर मांगने के लिए कहा परन्तु दास्या ने भगवान् से केवल इतना हि मांगा की, भगवान् नाथों के नाथ जगन्नाथ आप मुझ पर केवल इतनी कृपा कर दी जिये की में आपके भक्तों की सेवा कर सकों और जब आपका स्मरण करु तो आपके दर्शन कर सकूँ। भगवान् प्रसन्न हो गये और दास्या बोरी को आशीर्वाद दे कर वहां से अंतर ध्यान हो गये। हमें इस कथा से यह शिक्षा मिलती है की भगवान् तो भाव ग्रही हैँ जब हम भी पूरे शुद्ध भाव से भगवान् को हरिनाम के द्वारा पहकारें गे तो भगवान् आवश्य हमारे हृदय में भी प्रवेश करे गे। उनके लिए हमे मन रूपी यन्त्र को अपने वश मे करना होगा। श्रीमद भगवद्गीता मे भगवान कृष्ण यही तो अर्जुन को समझा रहे हैं की कैसे इस चंचल मन को वश मे करना है ओर ये इतना सरल भी नही है उसे वश मे करने का केवल एक मात्र उपाय है भगवान कृष्ण के विषय मे श्रवण करना।
जितना हो सके उतना हमे भगवान के बारे मे जानने की उत्सुकता होनी चाहिए।. अगर मन भगवान कृष्ण के प्रति अग्रसर हो जाता है तो हम इस भोतिकता की समस्त प्रकार की चिन्ताओ से मुक्त हो सकते हैँ। आगे बताते हुये प्रभुजी ने कहा की ऐसी कोई भी वस्तु जिससे भगावान श्री कृष्ण का कोई सम्बन्ध न हो उससे विरक्ति कर लेना ही बेहतर है। आज् भोतिक संसार मे हमारी सांसारिक वस्तुओ के प्रति आसक्ति है। यही इस संसार में हमारे बन्धन का कारण है। भोतिक संसार तभी सुख्मयी हो सकता है जब हम इस व की सभी वस्तुओ को कृष्ण भगवान की सेवा में लगा दें। भगवान श्री कृष्ण पर ध्यान केन्द्रित करना ही हमारे जीवन का उद्देश्य है। हम इस भोतिक संसार मे रहते हुये भी भगवान कृष्ण का नाम जप ओर उनकी सेवा कर सकते हैं। भगवान के नाम का जप करने से हम इस जड़ रुपी संसारिक जगल की आग से बच सकते हैँ।जो व्यक्ति भगवान के नाम का कीर्तन करता हुआ रथयात्रा में शामिल होता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।
उलेखनीय है की 28जून को शाम 5 बजे प्राचीन श्री रानी साहिबा मंदिर से, सभी शहर के निवासियों के सहयोग के साथ ही दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। सभी शहर निवासी रथ यात्रा में शामिल हो कर अपने जीवन को सफल बनाएं।

