करतारपुर, 09 जनवरी (जसवंत वर्मा):सिविल सर्जन जालंधर डॉ. राजेश गर्ग के निर्देशानुसार सीएचसी करतारपुर में एचपीवी वैक्सीन संबंधी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण की अगुवाई सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. किरण कौंसल ने की, जिसमें सभी एएनएम और एलएचवी ने भाग लिया। प्रशिक्षण मेडिकल ऑफिसर डॉ. पुनीत और एलएचवी इंदिरा द्वारा दिया गया। इस अवसर पर बीईई राकेश सिंह भी उपस्थित थे। डॉ. किरण कौंसल ने जानकारी देते हुए बताया कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) है और लगभग 99 प्रतिशत मामले उच्च जोखिम वाली एचपीवी किस्मों के कारण होते हैं। उन्होंने बताया कि एच पी वी वैक्सीन मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं—गार्डासिल और सर्वारिक्स। सर्वारिक्स वैक्सीन एचपीवी की किस्म 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करती है, जबकि गार्डासिल वैक्सीन किस्म 6 और 11 से भी बचाव करती है।
उन्होंने कहा कि एचपीवी के खिलाफ टीकाकरण सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। एचपीवी एक सामान्य यौन संचारित संक्रमण है, जिससे बचाव के लिए टीकाकरण व्यक्ति को खतरनाक किस्मों से सुरक्षित रख सकता है। एचपीवी टीका 14 और 15 वर्ष के बच्चों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। डॉ. किरण कौंसल ने यह भी कहा कि जांच और टीकाकरण के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी आवश्यक है। इसमें सुरक्षित यौन व्यवहार, अच्छी स्वच्छता आदतें, फलों और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूर रहना शामिल है।इस अवसर पर डॉ. पुनीत ने कहा कि एचपीवी त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैलने वाला एक सामान्य यौन संचारित संक्रमण है। कुछ एचपीवी संक्रमण लंबे समय तक बने रह सकते हैं और कैंसर में परिवर्तित हो सकते हैं। एचपीवी टीका एचपीवी संक्रमण से बचाव करता है। उन्होंने जोर दिया कि नियमित स्क्रीनिंग जैसे पैप टेस्ट और एचपीवी टेस्ट, गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले असामान्य परिवर्तनों की प्रारंभिक पहचान कर समय पर उपचार को संभव बनाते हैं।

