कपूरथला (गौरव मढ़िया) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, सत्संग आश्रम कपूरथला में आयोजित समागम के दौरान श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी निधि भारती जी ने विचारों में कहा कि जिस समय मानव समाज धर्म से विहीन हो जाता है तो उसमें अनेक कुरीतियां , भ्रांतियां अपना सिर उठा लेती हैं। समाज में जाति पाती, छूआ छूत जैसी नामुराद बिमारियां मनुष्यता की बेल को छिन्न भिन्न कर देती है,

सामाजिक अनेकता की गाठें बननी शुरू हो जाती हैं। इस भयावह स्थिति से मानव समाज को उभारने के लिए समय समय पर परमात्मा शक्ति अवतार धारण करती रही है और करती रहेगी, यह हमारे शास्त्रों का अखंड विचार है। लगभग छ: सौ साल पहले काशी नगरी में ऐसे ही हालातों को चुनौती देने के लिए एक महान क्रांतिकारी , युग प्रवर्तक परम पुरुष श्री गुरु रविदास महाराज जी ने जन्म लिया ।
जन्म भले ही साधारण था परंतु समाज के समक्ष अपने असाधारण व्यक्तित्व के कारण वे लोकप्रिय बन गए। उस समय में मानी जाने वाली छोटी कुल और गरीब कुल में पैदा होकर, इतनी सामाजिक बंदिशों के बावजूद भी ईश्वर के तत्व ज्ञान को प्राप्त कर परम तत्व का रूप हो गए। उनके इस अद्वितीय जीवन से यही प्रेरणा मिलती है कि हम भी उन्ही की भांति , तत्व ज्ञान प्राप्त कर, सच्ची भक्ति को अपना के समाज के साथ साथ अपने मन के भीतर अनेक प्रकार की बुराइयों को जड़ से उखाड़ कर साफ , सुंदर जीवन और समाज का निर्माण करने में योगदान दें।
जिसमें किसी को कोई गम न सताए। जिसे गुरु रविदास जी ने अपनी वाणी में बेगमपुरा के कह कर संबोधित किया। उनके दिखाए हुए मार्ग पर हम अग्रसर हों , यही उनके प्रति हमारा सच्चा नमन होगा । इन्ही विचारों के साथ दिव्य ज्योति के मंच के द्वारा सभी को श्री गुरु रविदास महाराज जी के पावन गुरुपूर्ब की बधाई भी दी गई।

