विमुक्त जनजातियां आज भी अधिकारों के लिए तरस रही हैं:धर्मबीर सिंह माहिया
कपूरथला( गौरव मढ़िया )विमुक्त जातिओं का एक प्रतिनिधिमंडल विमुक्त जाती भलाई बोर्ड के पूर्व चेयरमेन पंजाब सरकार धर्मबीर सिंह माहिया और भाजपा के जिला प्रधान रणजीत सिंह खोजेवाल व भाजपा नेता राजीव पाहवा के नेतृत्व केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश से मुलाकात कर अपनी मांगो संबधी एक ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन में मांग कि गई की पंजाब में विमुक्त जातियों को अनसूचित जनजातियों एसटी का दर्जा दिया जाए और प्रधानमंत्री नरिंदर मोदी से बैठक करने का समय दिलाया जाए।इस अवसर पर धर्मबीर सिंह माहिया ने कहा कि आजादी के पहले अंग्रेजों से लोहा लेने वाली जातियां आज भी आजादी को तरस रही हैं।
उन्होंने कहा कि देश की संसद में 31 अगस्त 1952 में विमुक्त,यायावर जातियों जैसे-गुर्जर,रैबारी,बंजारा,गाडोलिया सहित जातियों के लिए दो फैसले हुए थे।पहला आपराधिक जाति का दंश खत्म करना और दूसरा विमुक्त घुमन्तु जनजाति की श्रेणी बनाकर विशेष आरक्षण और स्वायत्तता देना,लेकिन उस फैसले के 70 वर्ष बीत जाने के बाद भी ये जातियां आरक्षण का अधिकार नहीं पा सकी है।
इनके लिए देश व प्रदेश में कई आयोग बने और सबने इनके पक्ष में पैरवी की।उन्होंने बताया कि उच्च और उच्चतम न्यायालयों ने भी इनको आरक्षण देने की टिप्पणियां की लेकिन दुर्भाग्य है कि इन जातियों की सत्ता में शून्य प्रतिशत भागीदारी है और ये जातियां आज भी अपने हक व अधिकारों को तरस रही हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन जातियों के लिए अलग श्रेणी बनाकर विमुक्त घुमन्तु अनुसूचित जनजाति का आरक्षण दिया जाए।इस अवसर पर हरजिंदर कुमार माहला,पंजाब प्रधान सेंसी समाज हरजिंदर कुमार माहला,उपप्रधान अशोक माहला,रोशन लाल,राममूर्ति करखल,कर्म सिंह भट्टी गुरदासपुर,बलविंदर सिंह गजुगाजी गुरदासपुर,रोंकी राम अलोवाल,गुरमीत सिंह दोस्तपुर,काका राम काला आदि उपस्थित थे।

