जालंधर: स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ अलकाला (यूएएच) और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के बीच एक असाधारण सहयोग से 43 स्पेनिश विद्यार्थियों और शिक्षकों के एक समूह ने स्पेन और पंजाब (चंडीगढ़) के बीच वास्तुशिल्प संबंधों का पता लगाने के लिए एक परिवर्तनकारी दौरा किया वास्तुकला भाषाविज्ञान के लिए “अलेक्स-2024″ नामक इस कार्यक्रम ने शैक्षिक भवनों के निर्माण और व्याख्या में गहराई से उतरने के लिए दुनिया के दो अग्रणी वास्तुशिल्प संस्थान एक साथ आगे आये। यह प्रोग्राम चंडीगढ़ (पंजाब) और स्पेन के बीच एक शैक्षिक पुल साबित हुआ।
अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमुख केंद्र और 1499 में स्थापित हुए अल्काला विश्वविद्यालय को वर्तमान में यूरोप और अमेरिका में अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्वीकार किया जाता है। इसकी इमारतों की सुंदरता और समृद्धि के कारण यूनेस्को ने इसे ‘विश्व विरासत स्थल‘ भी घोषित किया है एलपीयू के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन (एलएसएडी) में आयोजित सहयोगी स्टूडियो में दोनों विश्वविद्यालयों–यूएएच और एलपीयू– के लगभग 90 स्टूडेंट्स और फैकल्टी सदस्यों की भागीदारी देखी गई कार्यक्रम का उद्देश्य वास्तविक दुनिया की परियोजनाओं की जटिलताओं को खोजना और वास्तुकला क्षेत्र के भीतर रचनात्मक प्रक्रियाओं को और शानदार बनाना रहा।
यह दौरा अलकाला विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के लिए एक गहन अनुभव के साथ शुरू हुआ , जिसमें प्रसिद्ध आर्किटेक्ट ले कोर्बुसीयर और पियरे जेनेरेटे द्वारा डिजाइन किए गए शैक्षिक बुनियादी ढांचे के दौरे के साथ–साथ चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा भी शामिल था इन गतिविधियों ने वास्तुशिल्प डिजाइन और व्याख्या में मूल्यवान ज्ञान प्रदान किया । एलएसएडी में आयोजित स्टूडियो संबंधी सत्रों ने गहन अवलोकन और रात्रि स्टूडियो सत्रों में शामिल होने का अवसर प्रदान किया।इसने वास्तुशिल्प सिद्धांतों की गहरी समझ को बढ़ावा दिया और विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के स्टूडेंट्स के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया।
उद्घाटन सत्र में भारत में स्पेन के राजदूत महामहिम जोस मारिया रिदाओ डोमिंग्वेज़ उपस्थित थे, जिन्होंने वास्तुकला के स्कूलों को संबोधित किया और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया स्पेन में भारतीय राजदूत श्री दिनेश के पटनायक ने भी तालमेल सत्र का मार्गदर्शन किया और वास्तुकला के क्षेत्र में ऐसे वैश्विक सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
एलपीयू के संस्थापक चांसलर और संसद सदस्य (राज्यसभा) डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने वास्तुशिल्प शिक्षाशास्त्र के भीतर सहयोग के सर्वोपरि महत्व के बारे में साझा किया। डॉ. मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि सहयोगात्मक सिद्धांतों के आसपास वास्तुशिल्प डिजाइन स्टूडियो की संरचना करके, स्टूडेंट्स को वास्तविक दुनिया की परियोजनाओं को खोजने, विविध दृष्टिकोणों को समझने, और उनकी रचनात्मक प्रक्रियाओं को आत्मसात करने के लिए तैयार किया जाता है।
विजिटिंग स्टूडेंट्स ने एलपीयू परिसर के वास्तुशिल्प चमत्कार का अध्ययन किया, जो अपनी ‘श्रेष्ठ ‘ वास्तुकला और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत शहरी तर्ज़ के लिए जाना जाता है। मुख्य वास्तुकार और एलएसएडी के प्रमुख डॉ. ए आर अतुल सिंगला साझा करते हैं:”एलपीयू में सभी यह देखकर प्रसन्न हैं कि परिसर ने विदेशी प्रतिभागियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में कार्य किया।“इस आयोजन का मुख्य आकर्षण स्पेनिश और भारतीय स्टूडेंट्स के सहयोगात्मक कार्यों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी थी। एलपीयू की प्रो–चांसलर श्रीमती रश्मी मित्तल द्वारा उद्घाटन की गई इस प्रदर्शनी में फोटोग्राफिक डाक्यूमेंट्स (दस्तावेज़ीकरण), वीडियोग्राफी और कोलाज शामिल थे, जो स्टूडेंट्स की शैक्षिक बिल्डिंग दर्शन की व्याख्या को प्रदर्शित करते थे।

