कपूरथला 13 जून (गौरव मढ़िया) 28 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में रविवार को इस्कान कपूरथला की ओर से 28वी संध्या फ़ेरी लक्ष्मी नगर और शहीद उद्दम सिंह नगर में बड़े हर्षो उल्लास के साथ निकाली गई। जिसमें भक्तों का सैलाब देखने को मिला। लोगो मे भगवान की रथ यात्रा प्रति उत्साह दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। सभी शहर निवासी बड़ी हि उत्सुक्ता के साथ रथ यात्रा का इंतज़ार कर रहे हैँ। लोगो ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया। कालोनी वालो ने पुष्प वर्षा के साथ भगवान का स्वागत किया। ये हरिनाम संध्या फेरी दविंदर शुक्ला के निवास स्थान से शुरु हो कर कुलभूषण अग्रवाल के निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुई। भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते हुए संचालक नकुल दास (नीरज अग्रवाल) ने बताया की रथ यात्रा के दौरान हमने केवल खाते पीते हि नहीं रहना, अपना पुरा ध्यान हमने भगवान् के रथ मे रस्से को खींचने में लगाना है।

जिस प्रकार रथ यात्रा के दौरान हमारे रास्ते में बहुत से प्रलोभन आएंगे उसी प्रकार हमारी भक्ति के रास्ते में भी बहुत से प्रलोभन आते हैँ। हमे करना क्या है अपनी भक्ति को उन प्रलोभनों के कारण रोकना नहीं है। बल्कि जो भी हमारे जीवन में हमे मिलता है उसे केवल भगवान् की सेवा में लगाना है। यही असली कृष्णभावनामृत है। वैसे भी इस संसार में जो कुछ है वो भगवान् का हि तो है, और हम सब उनके दास हैँ, तो मालिक की चीज मालिक को वापिस करने में केसा संकोच। हमने किसी भी हालात में भक्ति के पथ को नहीं छोड़ना क्योंकि केवल भक्ति के द्वारा हि हम भगवान् को जान सकते हैँ, भगवान को पा सकते हैँ। परन्तु हमे भक्ति है क्या यह कैसे पता चलेगा? भक्ति के बारे में हमे केवल भगवदगीता से पता चल सकता है।

कहने का तात्पर्य है की अगर हम भगवान कृष्ण के किसी भक्त से उनकी लीलाओ ओर उनके गुणों के बारे मे श्रवण करेगे तभी हमारे हृदय में भगवान् के प्रति प्रेम उत्पन्न हो सकता है ओर कीर्तन के द्वारा हम भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर सकते हैं। हमें भगवान् श्री कृष्ण से यही प्रार्थना करनी चाहिए की भगवान् आपने तो पतीतों का उधार करने के लिए अवतार लिया है और इस संसार में मुझ से अधिक पतीत कोई नहीं है। आप कब मेरा उधार करोगे। भगवान् तो भाव ग्रही हैँ जब हम भी पूरे शुद्ध भाव से भगवान् को हरिनाम के द्वारा पहकारें गे तो भगवान् आवश्य हमारे हृदय में भी प्रवेश करे गे। उनके लिए हमे मन रूपी यन्त्र को अपने वश मे करना होगा। श्रीमद भगवद्गीता मे भगवान कृष्ण यही तो अर्जुन को समझा रहे हैं की कैसे इस चंचल मन को वश मे करना है ओर ये इतना सरल भी नही है उसे वश मे करने का केवल एक मात्र उपाय है भगवान कृष्ण के विषय मे श्रवण करना। जितना हो सके उतना हमे भगवान के बारे मे जानने की उत्सुकता होनी चाहिए।. अगर मन भगवान कृष्ण के प्रति अग्रसर हो जाता है तो हम इस भोतिकता की समस्त प्रकार की चिन्ताओ से मुक्त हो सकते हैँ।
जो व्यक्ति भगवान के नाम का कीर्तन करता हुआ रथयात्रा में शामिल होता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। उलेखनीय है की 28जून को शाम 5 बजे प्राचीन श्री रानी साहिबा मंदिर से, सभी शहर निवासियो के सहयोग के साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। सभी शहर निवासी रथ यात्रा में शामिल हो कर और रथ के रस्से को खींच कर अपने जीवन को सफल बनाएं।

