कपूरथला( गौरव मढ़िया)गत दिवस दिव्य ज्योति जागृति संस्थान में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के अंतर्गत श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी रमन जी ने अपने विचारों में कहा कि आज सारा संसार दुखों से मुक्त होना चाहता है, सुख तथा शांति को प्राप्त करना चाहता है।

इसी सुख की तलाश में कभी सिनेमा हॉल, क्लब्स, नशे का सेवन इत्यादि या व्यक्ति यह सोचता है कि अपनी कामनाओं , इच्छाओं की पूर्ति के लिए भरसक प्रयास करता है, इसी सोच में शायद सुख प्राप्त हो जाएगा। किंतु यह केवल भ्रम है। कामनाओं का अंत कभी नहीं हो सकता।

आग में जितना घी डालो, वह उतनी और बढ़ती है।ठीक इसी प्रकार कामनाओं, इच्छाओं की पूर्ति हेतु जितना दौड़ता, यह इच्छाएं और भी बढ़ती जाती हैं। शास्त्र कहते हैं कि इस पूरी पृथ्वी पर जितना भी अन्न , सोना, पशु या स्त्रियां हैं, ये सब मिल कर भी एक कामुक व्यक्ति की कामना की पूर्ति नहीं कर सकते। ये तृष्णा कभी समाप्त होने वाली नहीं ।

इसलिए हमारे संत कहते है सुख अर्जन में नहीं विसर्जन में है, भोग में नहीं त्याग में है, तृष्णा में नहीं संतोष में है। जीवन में कामनाओं का विसर्जन, त्याग सहित संतोष का मार्ग स्वत ही पाया नहीं जा सकता, बल्कि ब्रह्मज्ञानी तत्व दर्शी महापुरुष की शरणगति प्राप्त कर आत्म तत्व का बोध हो जाने के पश्चात ही प्राप्त हो सकता है। अतः यदि सुख वी शांति को पाना चाहते हैं तो ब्रह्मज्ञानी तत्व वेरता महापुरुष की शरण में जाकर आत्म तत्व यानी परमात्मा का साक्षात्कार प्राप्त करें। इस के साथ ही साध्वी तेजस्विनी भारती जी के द्वारा स्माधुर भजनों गायन किया गया।

