कपूरथला( गौरव मढ़िया) दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान शाखा कपूरथला में साप्ताहिक सत्संग समागम के दौरान श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी ऋतु भारती जी ने एकत्रित जन समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा कि ब्रह्मज्ञान हृदय में ब्रह्म के प्रकाश स्वरूप का प्रत्यक्ष दर्शन करना है।

हर युग में पूर्ण गुरुओं ने जिज्ञासुओं को इसी ज्ञान में दीक्षित किया है। इस प्रक्रिया में वह शिष्य की दिव्य दृष्टि खोलकर उसे अंतर्मुखी बना देते हैं। शिष्य अपने अंतर्गत में ही अलौकिक प्रकाश का दर्शन और अनेक दिव्य अनुभूतियां प्राप्त करता है। वर्तमान में, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी भी समाज को इसी ब्रह्मज्ञान में दीक्षित कर रहे हैं। नितांतनिःशुल्क रूप से।
आप भी यदि इस महान ज्ञान को पाने के इच्छुक हैं, तो संस्थान की किसी भी नजदीकी शाखा से संपर्क कर सकते हैं। साध्वी हरिप्रीता भारती जी ने अपने मधुर कंठ से उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।

