करतारपुर, 12 नवंबर (जसवंत वर्मा ) सिविल सर्जन जालंधर डॉ. राजेश गर्ग के आदेशानुसार और मेडिकल ऑफ़िसर (डेंटल) डॉ. जैक्सन की अगुवाई में सी.एच.सी. करतारपुर तथा इसके अधीन आने वाले आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में विश्व निमोनिया दिवस मनाया गया। इस अवसर पर डॉ. हरप्रीत सिंह, डॉ. साहिल, बी.ई.ई. राकेश सिंह, वरिष्ठ सहायक नरिंदर सिंह, एल.एच.वी. इंदिरा, ए.एन.एम. अमरजीत कौर, स्टाफ नर्स जगजीत कौर तथा आशा वर्कर उपस्थित थे।
डॉ. जैक्सन ने बताया कि निमोनिया पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, लेकिन यह बीमारी पूरी तरह से रोकथाम योग्य और इलाज योग्य है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि यदि बच्चे में खाँसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
डॉ. हरप्रीत सिंह ने बताया कि निमोनिया के शुरुआती लक्षणों में सूखी खाँसी, हल्का बुखार, सिरदर्द और थकावट शामिल होते हैं। जब बीमारी गंभीर हो जाती है, तो तेज़ बुखार, पसीना, ठंड लगना, नाखून या होंठ नीले पड़ना और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में बच्चे खाने-पीने में असमर्थ भी हो सकते हैं।
बी.ई.ई. राकेश सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से ‘साँस प्रोग्राम’ के तहत निमोनिया की रोकथाम और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि इस बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए माता-पिता को नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का दूध पिलाने और छह महीने तक केवल माँ का दूध ही पिलाने की आदत बनानी चाहिए।

