जालंधर, दिसंबर की सर्द हवा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) का परिसर गुलदाउदी के जीवंत रंगों से खिल उठा। वार्षिक गुलदाउदी फूल प्रदर्शनी ने यूनिवर्सिटी के मैदान को फूलों के शानदार रंगों में बदल दिया। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के आईसीएआर-मान्यता प्राप्त कृषि विद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने खूबसूरत फूलों की खेती के प्रति यूनिवर्सिटी के समर्पण को पेश किया।

प्रदर्शनी ने कैंपस को गुलदाउदी के रंग-बिरंगे फूलों में बदल दिया, जिसे यूनिवर्सिटी के कृषि छात्रों ने कुशलता से उगाया था। पीले, लाल, सफेद, गुलाबी और बैंगनी रंगों वाले फूल पूरी मेहनत के साथ उगाए गए, जिन्होंने छात्रों की कृषि विशेषज्ञता को प्रदर्शित किया। प्रमुख आकर्षणों में शानदार फूलों की रंगोली थी, जिसे छात्रों ने बहुत ही क्रिएटिविटी से तैयार किया था। इसमें उन्होंने फूलों और उनकी पंखुड़ियों का इस्तेमाल करते हुए क्रिएटिविटी के साथ अपनी सांस्कृति को भी प्रदर्शित किया।

यूनिवर्सिटी के एक्सपेरिएण्टियल लर्निंग प्रोग्राम के हिस्से के रूप में, छात्रों ने खुद बनाए हुए आभूषण और जैविक रूप से उगाई गई सब्जियों की प्रदर्शनी भी लगाई। इन स्टॉलों ने विद्यार्थियों को एंटरप्रिन्योरशिप जैसे प्रोडेक्ट बनाने उगाने, मार्किटिंग और बेचने का अनुभव हासिल करने का मौका दिया। इस पहल ने छात्रों की सोच और कड़ी मेहनत को उजागर किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन एलपीयू की प्रो-चांसलर कर्नल डॉ. रश्मि मित्तल ने अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों के साथ किया।

डॉ. मित्तल ने छात्रों और शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की, पूर्ण विकास की शिक्षा को बढ़ावा देने में अनुभवात्मक कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। प्रदर्शनी ने एलपीयू के उभरते कृषि इंड्रस्टिलिस्टों के कौशल को प्रदर्शित किया, जिससे प्रैक्टिकल लर्निंग के महत्व की जानकारी मिली। उत्तर भारत में “गुलदाउदी” के रूप में जाना जाने वाला गुलदाउदी न केवल दुनिया के सबसे पुराने खेती वाले फूलों में से एक है, बल्कि एक प्रमुख ग्लोबल कर्मशियल फसल भी है, जो कृषि और उद्योग दोनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रदर्शित करता है।

