कपूरथला( गौरव मढ़िया ) हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए रवनीत बिट्टू ने भाजपा में शामिल होकर पंजाब के भूतपूर्व मुख्यमंत्री व अपने दादा शहीद बेअंत सिंह की शहादत का अपमान किया है।यह विचार पंजाब प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के कार्यकारी राज्य अध्यक्ष सुभाष भार्गव ने बुधवार को बातचीत दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वैसे तो किसी भी पार्टी में जाना या नहीं जाना यह हर व्यक्ति का अपना व्यक्तिगत निर्णय होता है। मगर 90 के दशक में उग्रवाद के भयानक दौर में पंजाब में शांति के मसीहा बनकर उभरे दिवंगत मुख्यमंत्री शेरे पंजाब शहीद बेअंत सिंह ने जिस तरह पंजाब की एकता व अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर अपने शरीर को तिरंगे में लिपटने का सौभाग्य प्राप्त कर पंजाब की आने वाली पीढ़ियों के लिए कुर्बानी की मिसाल कायम की,
बिट्टू के इस फैंसले से उनकी रूह को अवश्य ही पीड़ा पहुंची होगी। क्योंकि शहीद बेअंत सिंह गांधीवादी विचारधारा वाले नेता थे तथा सभी धर्मों का बराबर आदर करते थे, भाजपा जैसी कट्टर सोच वाली पार्टी में रवनीत बिट्टू के शामिल होने से जहां उनकी रूह को पीड़ा पहुंची होगी वहीं यह भी विचारणीय है कि जिस संगठन ने राजनीतिक तौर पर उनकी पहचान बनाई तथा आज जिस मुकाम पर वह खड़े हैं। यह सब उनको कांग्रेस पार्टी में रहकर ही मिला है
मगर उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए सम्मान की बिल्कुल भी प्रवाह ना करते हुए भाजपा जैसी कट्टरवादी पार्टी जिसने पिछले 10 सालों से देश को हर क्षेत्र में अस्थिर करके रख दिया हो तथा जाति व धर्म के नाम पर लोगों को बांटकर देश का माहौल खराब किया हो और जिस संगठन को कल तक वह बुरा भला बोलते थे। आज उसी संगठन में जाकर खड़े हो गए हैं। इससे यह साबित होता है कि आज स्वाभिमान से राजनीति करने वाले लोगों का कितना अभाव होता जा रहा है। राजनीति एक समाज सेवा का कार्य था जिसे आज के नेताओं ने व्यापार बनाकर रख दिया है।
आज जिसको जहां फायदा दिखता है उसी का दामन थाम लेता है। आया राम गया राम की राजनीति आज एक फैशन सा बन गया है, मगर पंजाब की जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा कि सभी पंजाबी एक मत होकर इन चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशियों को जिताकर संसद में भेजें ताकि देश में चल रहे 10 वर्षों के कुशासन को समाप्त कर कांग्रेस के नेतृत्व में एक सशक्त सुशासन स्थापित किया जा सके।

